स्वामी भक्त कुत्ता –

पूंछ हिलाता
हर समय घूमता रहता है
इर्द गिर्द अपने स्वामी के
कुछ पाने की चाह में
या चलता रहता है साथ -साथ
किसी भी झाड़ी बृक्ष चट्टान
या पहाड़ तक पर भी
पेशाब करता हुआ
अपने आधिपत्व की पहचान छोड़ता
अपने पंजों से जमीन खरोंच कर भोंकता
मानों स्वामी के ही हुक्म पर
औरों को सचेत करते हुए
कि यहाँ केबल अपना हुक्म चलेगा
कहीं किसी द्रोपदी चीर हरण में
या कोई सवूत मिटाने में
बना रहता है अंग-संग /रक्षक
उसके एक इशारे पर
सूघनें मात्र से ही
ढूंढ लेता है वह अभी‍ष्ट
चुप कराने में किसी भी
उठती हुई आवाज़ को
भीवत्स भोंकता है
क्यों कि-
वह केवल यही जानता है
कि उसका स्वामी जो करता /कहता है
केवल और केवल वही सत्य है I

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