पेट की सलवटें । (गीत)

चल, पेट की सलवटें, मिटाने की कोशिश करें ।
हाँ, इक नए नेता की, फिर आज़माइश करें ।

अन्तरा-१.

गरीबी का बुखार है, फकीरी का खुमार भी..!
चल, कड़ी भूख की फिर से फरमाइश करें ।
हाँ, इक नए नेता की, फिर आज़माइश करें ।

अन्तरा-२.

सुना है, ज़हर की खेती होती है देश में..!
चल, भीख में राशन की फिर गुजारिश करें ।
हाँ, इक नए नेता की, फिर आज़माइश करें ।

अन्तरा-३.

बच्चों की कसम है बाबू, अब वह रोते नहीं..!
चंद सांसों के लिए, क्यों न फिर सिफारिश करें ?
हाँ, इक नए नेता की, फिर आज़माइश करें ।

अन्तरा-३.

या रब, देख रहा है ना सब? कह दे उन्हें…!
इक बार फिर, हसीं वादों की तेज बारिश करें ।
हाँ, इक नए नेता की, फिर आज़माइश करें ।

मार्कण्ड दवे । दिनांक – १९-०३-२०१४.