नियम

नियम !
हर नियम सिर्फ लड़कियों के लिए क्यूँ हैं
क्यूँ बाँध के रखा हैं हमें इस बंधन में
जकड़न महसूस करती हूँ,
क्यूँ किसी का हमेशा साथ रहना जरुरी होता हैं
कमजोर काया हैं , कमजोर दिमाग नहीं !
उड़ना चाहती हूँ मैं
क्यूँ मेरे पंख काटने पर तुले हो
अरे ! तुम्हे तो अपने मर्द होने पर अभिमान हैं
फिर क्यूँ एक लड़की से डरते हो
क्या कहा ! नहीं डरते हो
अरे जाओ जाओ ! क्यूँ व्यर्थ की बातें करते हो
तुम्हें डर लगता हैं ,
नारी से ही नहीं , नारी के प्रतीकों से भी
चूड़ियों को बताते हो कमजोरी
पर कांच की चूड़ियाँ
टूटने पर
चोट तो दे ही देती हैं
खून रिस जाता हैं
अब फटने वाला हैं ज्वालामुखी
अब भी समय हैं, चेत जाओं
क्यूंकि ज्वालामुखी जब फटता हैं
तो होता हैं सिर्फ विध्वंश

विध्वंश !

-श्रुति

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