चरित्रहीन पत्नी (कहानी )

“बेटी अनु अंदर से अपने कपडे उठा ला,चलो आज पापा जी के साथ मौसी के यहाँ घूमने जाते हैं”.मुस्कुराते शालिनी अपनी बेटी से बोली”.जी मम्मी अभी आई”अनु ने कहा.
अचानक घंटी बजने की आवाज,शालिनी ने दौड़कर गेट खोला,देखा अनु के पापा बाजार से जरुरी सामान लेकर आ गए.”शालिनी अभी तक तैयार नहीं हुईं न अनु को तैयार किया पता नहीं क्या करती रहती हो ?”मदन बोले .
“जी अभी दस मिनट में तैयार हो जाती हूँ “.मुँह बनाते शालिनी ने कहा.
जब तक शालिनी तैयार होती तब तक मदन बाइक निकालकर हॉर्न बजाने लगे,”शालिनी जल्दी निकलो गाड़ी तैयार है”. “जी अभी आई.”अंदर से फिर वही उत्तर मिला.
शालिनी अनु और मदन सावित्री (मौसी) के यहाँ पहुँच जाते हैं.`मौसा जी आगए ………` कहते अनुज और विवेक अंदर चले गए.सावित्री बाहर निकली,”ओह !आज तो बड़े दिनों बाद खबर ली,हम समझ रहे कि मदन जी हमें भूल ही गए,चलो अंदर.” “नहीं ऐसी कोई बात नहीं हैं,अक्सर क्या हैं कि हमें समय नहीं मिल पाता,क्या करें मजबूर हैं?”. मुँह बनाते मदन बोले.
पानी से भरा गिलास सामने रखते अनुज बोला,”मौसा जी पानी पीलो”. थोड़ी देर में,प्लेट में नमकीन चाय लेकर विवेक अगया ” मौसा जी नास्ता कर लो”
“बेटा कैसे हो,स्कूल जाते हो,पढाई ध्यान से करना”.मदन ने जेब से दस का नोट निकालकर उन्हें थमा दिया.
विवेक हँसता अंदर भाग गया.”
सुबह मदन ने घर जाने की अनुमत माँगी,पास खड़ी किसी बच्ची ने छींक मार दी,सावित्री ने भी न जाने की मिन्नतें की किंतु मदन नहीं माने,`अरे कुछ नहीं होता ये सब प्राचीन अंधविस्वास है आज के समय में कुछ नहीं `.
सावत्री ने भी न मानने पर आज्ञां प्रदान कर दी.
थोड़ी दूर निकले कि तेज गति से लहराता ट्रक,बाइक से टकराया.मदन और अनु एक तरफ गिर पड़े,शालिनी को रोंदता आगे निकल गया,खून से लथपथ फड़फड़ाते चिल्लाते दम तोड़ दिया.अनु हिचकियाँ भरते मम्मी ……..
मम्मी कहते बेहोश हो गई.`अब में क्या करूं,हाय!राम ये क्या हो गया?काश !कोई मेरी सहायता करे`.मुँह पौंछते मदन ने मोबाइल घुमाया.”सावित्री..सावित्री ..हमें बचाओ”.कहते खुद बेहोश हो गए.
सावित्री पति के साथ घटना स्थल पर पहुँच गईं.लोंगो की काफी भीड़ जमा थी.शालिनी को उठाकर अस्पताल
भी ले गए किंतु डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.अब क्या था ?सारी दुनिया मिटटी में मिल गई.काश!उसने सावित्री की बात मानी होती तो शायद ऐसा नहीं होता.
दिन महीने गुजरते गए पर वह उस घटना को भुला नहीं पा रहा लोंगो ने बहुत समझाया किंतु कुछ नहीं सब व्यर्थ.बच्ची भी ज्यादा बड़ी नहीं उसकी पढ़ाई लिखाई पर भी ध्यान देना था.
एक दिन घर वालों ने दूसरी शादी की बात छेड़ी,उसके दिलों दिमाग में आग लग गई.वक्त गुजरता गया किंतु हालात वही नाजुक,लाख कोशिशों के उपरांत दूसरी शादी कर दी.दूसरी पत्नी बेटी अनु का ख्याल रखने लगी,समय पर पढ़ने भेजना.अनु बहुत खुश थी.रही मदन की बात जब अनु खुश थी तो मदन क्यों नहीं होते इसलिए घर की सारी जिम्मेदारी रागिनी के हाथ सौंप दी.
मदन कभी कभी कामों में इतने व्यस्त हो जाते कि घर भी नहीं आ पाते उधर मालिक खाने पीने की व्यवस्था कर देता.
रात का समय था मदन जरुरी काम से घर आ रहे थे,धम्म सी आवाज सुनाई पड़ी धीरे धीरे पैरों की आहट,उसने इधर उधर देखा कोई नहीं आवाज उसके घर से ही आई थी.मदन दौड़कर दीवाल से छिप गए.एक इंसान कमरे में घुसा उसकी पत्नी के साथ गलत हरकत करने लगा.मदन ने खिड़की से झाँककर देखा.
अनु अचानक जगी,”कौन है?हमारे कमरे में इतनी रात कैसे आए.” “कोई नहीं बेटी,ये तुम्हारे अंकल है,वैसे ही आए है”.रागिनी ने सहमा उत्तर दिया.अच्छा सुबह,मैं पापा जी को बोल दूँगी,रात अंकल जी आए थे”.रागिनी का चेहरा आग की तरह लाल हो गया,चिल्लाते बोली,”खामोश सुबह कुछ कहा खाल उधेड़ कर रख दूँगी”.
अनु जोर से रोने लगी,दो हाथ भी मार दिए.”हरामजादी चुपके सोजा नहीं इसी वक्त घर से बाहर निकाल दूँगी”.मदन को सहन नहीं हुआ झट से अंदर आया और उस इंसान से भिड़ गया.रागिनी ने सोचा.`अब क्या करूँ,सुबह बदनामी होगी,मैं कही की नहीं रहूँगी.समाज में मेरी नाक कट जायेगी.झट से पास पड़ी बोतल तोड़ी और मदन के पेट में मार दी .अपने यार के साथ खिड़की से भाग निकली.

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