नारी का सम्मान करो

नारी जाति का जहां में करना होगा सम्मान ।
तन को कष्ट भले हो सह लीजै अपमान॥
सह लीजै अपमान माँ का रखना है सम्मान ।
सुन्दर सफल जीवन माँ करतीसब कल्यान ।।
मान और सम्मान बचाना हम सबकी जिम्मेदारी ‘।
ममता का पावन आँचल गाता गीत पुकार हमारी ॥
मनमानी माथे बढी- चढी जनता की का लाचारी ।
सह लीजै अपमान शहर ज्यों -त्यों स्वेच्छाचारी ॥
नारी को का समझ बैठा स्वेच्छाचारी बलवान ।
दहल उठेगी माँ की ममता जबकैसे होगा कल्यान॥
कैसे होगा कल्यान जहां को कौन किसे बतावे ।
मर्यादा मिट! मरी मानवता! जहां को कौन सिखावे ॥
वही फलक वही झंकार वही शक्ति मां की प्यारी ।
दुश्मन को निज मात दिखाती शिव की है कल्याणी ॥
शिष्ट शराफतशान बढी-चढी कोलाहल का भारी ।
अनगिन अधिकार भोग का लोलुप अत्याचारी ॥
नाहक नारी पर जहाँ जब जो कोई हाथ उठायेगा ।
मा की ममता दहल -दहल कर मानव गिर जायेगा ॥

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