मौसमी मन

थी चाहत फूल की हेलया टा टा काँटा मिला ।
गया पकड़ा पगडंडी पर चटाचट चाटा मिला ॥
हिमाकत हुस्न छूने की दर्दे दिल खाटा मिला ।
पावडर प्रेम के बदले चमकता साटा मिला ॥
अच्छा हुआ था कतई उससे सगाई ना किया ।
रूप क पुजारी पुजारन नूर जिसे देख लिया ॥
फिरा जिसके खातिर गलियन मर्म हमने देख लिया।
आशिकों को उसका हमने निशाना ना बनने दिया ॥
सारी दुनियाँ गलती मेरी जब तलक न मान लिया ।
मै छेड़ता रहा फेस बुक पर तब तलक गिला ।
सरे बाजार जब तलक मेरी पिटाई ना किया ॥

2 Comments

  1. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 08/05/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 08/05/2018

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