भक्ति कविता

बृन्दाबन औ मथुरा काशी गया प्रयाग हरिद्वार
सभी तीरथ की महिमा न्यारी नमन मेरा बारबार
पशुपतिनाथ गोसाईं निर्मल मन का भाव
मझधार में उलझे जिनकी होती नय्याँ पार
ये सारा जीवन अर्पण तुझ में राधेश्याम
नष्ट होवें सारे पाप मिट जायें ब्यभिचार

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