होली

इश्क़ की आँख मिचौली भी देखी |

उनकी कई बनी होली में हमजोली भी देखी |

उनके संग हमने भी खेली थी होली |

पर हमारी तो रही खाली की खाली झोली | |


होली का रंग देखो उन पर कैसा चढ़ा |

जब रंग दिया था हमने उनका सुन्दर मुखड़ा |

तब तो वे भी उस दिन कुछ भी नहीं बोली |

यही तो है होली में होली की होली ||


पर जब हम गये थे उनके घर मिलने होली |

वो तो मगन थी हमारे रफ़ीक़ों के संग , कर रही थी ठिठोली |

हम वहां जाकर भी उनसे क्या कह पाते |

वे तो नशे में मस्त थी अपनों के साथ करके बातें ||


होली के मौसम में ही कहते हैं इश्क़ पनपता है |

वह हर शख्स पर अपना अलग-अलग असर करता है |

होली का रंग तो कभी चढ़ता है चोखा |

कभी खाते है होली के रंग रंगने में धोखा ||


किसी किस्मत वाले की होली होती है रंगीन |

कोई तो बेचारा होली में भी रहता है गमगीन |

चलो उन दुखियारों का भी दुःख करें हम दूर |

हमारी भी इच्छायें पूरी होंगी जरुर ||


हमने तो सजाई होली पर रंगीन रंगोली |

पर उनकी कही बात तो लगी हमें जैसे गोली |

पर कौन परवाह करता है, होली में किसी की बोली |

वह तो न जाने कब हमें छोड़ अपने प्रिय की होली ||

holi

holi colors

 

One Response

  1. KOMAL PRASAD SAHU 15/04/2014

Leave a Reply