कुछ लोग तो हैं

झूठ और धोखाधड़ी
जब फ़ैली हुई है हर तरफ
और आपके मुँह पर ही
ताल ठोककर झूठ बोलकर
लोग कहते हैं कि वे सत्यवादी हैं
और सदा सत्य बोलते हैं,
सत्य की लड़ाई लड़ रहे हैं
झूठ बोलकर ,
तो लगता है
कि दुनिया से सत्ययुग मिट गया है
और घोर कलियुग आ गया है |
पर कहते हैं
जब असत्य ज्यादा बढ़ जाएगा
तो प्रलय आ जाएगा
और सृष्टि का नामोनिशान मिट जाएगा |
पर न तो प्रलय आ रहा है
न सृष्टि का नामोनिशान मिट रहा है |
तो क्या जो झूठ है वही सत्य है
और सबसे बड़े झूठे, सबसे बड़े सत्यवादी !
क्या मूल्य बदल गए हैं !
नहीं, दुनिया में जरूर
कुछ लोग तो हैं
जो अब भी झूठ नहीं बोलते हैं |
सदैव सत्य बोलते हैं,
सत्य ही आचरण करते हैं |
पर उनका सत्य इतना है स्वाभाविक
कि वे यह अनुभव भी नहीं कर पाते हैं
कि वे सत्य बोल रहे हैं |
और वे अनाम ही रहते हैं
और अनाम ही रह जाते हैं
और सम्भवतः इसीलिए
दुनिया अभी तक टिकी हुई है |

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