हास्य कविता

हास्य कवि सम्मलेन में
हँसी का तड़का
जाने कहाँ
गुम हो गया ?
हर चेहरे पर उदासी मँडराने लगी
बादल बनकर डराने लगी
रूप बदलकर !
तभी भीड़ में
एक कवि को जोश आया
मानो होश आया
लिटाकर गधे को
गद्दे पर
माला पहनाकर फूलों की
पाँव स्पर्श कर
लड्डू खिलाया
टीका लगाकर ,
बजाकर हारमोनियम
ठुमका लगाया !

2 Comments

  1. kallu sakya 18/08/2014
  2. डी. के. निवातिया DK Nivatiya 19/08/2014

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