गधों के मौहल्ले में

गधों के मौहल्ले में
माननीय महोदय जी पधारे
खींचकर तिलक लम्बे आड़े
लगाकर भभूत
पहनकर खादी कुरता
लपेटकर धोती !
मंच पर करते प्रहार शब्दों का
माडकर शहद में ,
मानो छानकर फैंकते चीज को
अनोंखे भाषण में !
तभी भीड़ से
आवाज गूँजी
चीरती हवाओ को
सन्नाटा मचाती !
सामने आया
नौजवान गधा
होश गँवाकर
बकने लगा,बचन टेड़े ,
सज्जनों मेरी सुनो
हमारी तरक्की है
क्योंकि अपने मौहल्ले में ?
ऐसे नेताओं की
ड्यूटी पक्की है !

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