आया होली का त्यौहार

फागुन कि बहार हैं
आया होली का त्यौहार हैं
सबके हांथों में पिचकारी हैं
रंगों में डुबोने कि पूरी तैयारी हैं
अद्भुत अनोखा यह त्यौहार
ना जाने गरीब -अमीर का अंतर
ना हीं धर्म – जाती का भेदभाव
मत करो अब तुम इंकार
हो जाओ अब तुम भी रंगो में सराबोर
देखों उधर लेकर सब निकले अबीर -गुलाल हैं
आज मिटने सब मन के मलाल हैं
ऊपर से देखो किसी ने मारा पानी का गुब्बारा हैं
आज मौसम कुछ ऐसा हैं
हर तरफ खुशियों का फव्वारा हैं
ओह !अब तुम शर्माओं मत
घर से निकल भी जाओं अब
देखों उधर जोगीरा का स्वर
मस्ती का आलम और किधर
पुए और मिठाइयां हैं
खाने को हैं गुझिया भी
कोयल देखों कुक रही
होली कि मस्ती में जैसे वो भी झूम रही
हर तरफ मिठास हैं
इसलिए तो यह त्यौहार ख़ास हैं

पुए और मिठाइयां हैं
खाने को हैं गुझिया भी
कोयल देखों कुक रही
होली कि मस्ती में जैसे वो भी झूम रही
हर तरफ मिठास हैं
इसलिए तो यह त्यौहार ख़ास हैं
होली मुबारक !
– Shruti Roy