नारी————— शक्ति

सृष्टि को रचती है नारी ,

गरिमा-मय गौरब सी नारी.

करुणा-दया-ममता की मूरत,

सुन्दरता की प्यारी सूरत.

सद्विचार सदभाव से संपन्न,

दोष –दुर्गुण का करे उन्मूलन .

पत्नी -भगिनी-जननी होती,

दीपक की ज्योति सी जलती.

तुलसी की पौधे सा  पावन,

उनसे शोभित घर और आंगन.

स्वप्रेरित है जिसकी भक्ति ,

कहलाती वो  नारी-शक्ति .

3 Comments

  1. सुनील कुमार दास 11/03/2014
  2. पंडित राजन कुमार मिश्र Rajan 15/12/2015

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