गजल

उनसे होगी फिर मुलाक़ात सोंचा न था
आँखों से होगी फिर बर्षात सोंचा न था

वैसे उन्हें हमने न भुलाया था कभी
खुद आएंगी फिर दिलाने याद सोंचा न था

अतीत बनके वो पड़ी थी किश्मत में मेरी
लौटकर आएगी फिर जजबात सोंचा न था

अँधेरे में जीने कि हमें हो गयी थी आदत
निकल आएगी पूनम कि रात सोंचा न था

रेगिस्तान बन गयी थी ये सुखी जिंदगी
गुलिस्तां बनके होगी आवाद सोंचा न था

हरि पौडेल
नेदरल्याण्ड

3 Comments

  1. vandana 08/03/2014
    • mohitGupta 15/03/2014
  2. deveshdixit deveshdixit 02/04/2014

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