गजल-बढे भारत की आबादी

बढे भारत की’ आबादी करो तुम प्यार की शादी |
हमारी कामना ये है कि हो संसार की शादी ||

तुम्ही हो आदि मानव मनु वो लड़की भी है’ शतरूपा |
मिलाओ श्रृष्टि में अमरित न हो तकरार की शादी ||

कभी गंगा और सागर मनुज का वेश धरते है |
बने इतिहास कितने हैं हुई श्रृंगार की शादी ||

बहुत मीठा ये’ बंधन है बहुत अनुभव कराता है |
मेरे भाई मेरी मानो यही सुविचार की शादी ||

जरूरत है दो’ तारों की अगर बत्ती जलाना है |
बनी अब लडकियाँ है फेस होती तार की शादी ||

बताता शिव मे’रे भाई सदा न्यूट्रेल ही’ रहना तुम |
हुए जो फेस है भाई हुई फुफ़कार की शादी ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी
नॉएडा -०९४१२२२४५४

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