भिखारी गधा

द्वार-द्वार जाकर
कुण्डी खटखटाता
अपनी पराई
आप बीती
जग बीती
कहानी सुनाकर भीख माँगता
एक होनहार गधा !
किंतु यही अपराध था उसका
सजा भी खास नहीं थी !
भिखारियों के मौहल्ले में
कई सालों से
भर्ती होनी थी
बुद्धिमान गधे की !
इसी बात को
ध्यान में रखकर
वहाँ के मुखिया श्रीमान जी ने
झठ से मोहर लगा दी
हाथों में
रोते -चिल्लाते बच्चों की
एक मोटी सी
किताब थमा दी ,
भीख माँगकर
भिखारियों के पेट पालने की
कड़ी ड्यूटी दी !
मानो बेरोजगार गधे को
नौकरी देकर
जिंदगी बना दी !

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