गधों के मौहल्ले में

गधों के मौहल्ले में
श्रीमान जी चकराए
भूलकर खूब गोलगप्पे खाए
देकर ताव मूँछ पर
सिर पर
बार – बार कंघी घुमाए
चैन तनिक नहीं
दूर जाकर
आराम फरमाए!
फुसफुसाती आवाज कान में ,
गूँजने लगी
श्रीमान जी सिर इधर – उधर घुमाए
किन्तु सामने गधों की बारात
पीटती ढोल नगाड़े !
श्रीमान जी मुँह फुलाए
घुस गए कमर हिलाए
धीरे – धीरे ठहाका लगाते!
गधे के बच्चे ने
मुस्कुराकर कहा ,
भाईओं दोस्तों
हमारा समाज पावन उज्जवल है
क्योंकि हमारी तरक्की पर
श्रीमान जी भी आते है !

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