गधे की टेंशन

गधे को टेंशन है
कि पढ़ा -लिखा क्यों नहीं ?
क्यों नहीं बना
होशिआर – समझदार समाज में ?
आह : भरकर विचार लेकर
एक गधा
शिक्षक जी के पास पहुँचा!
सर , मैं पढना चाहता हूँ
कुछ बनना चाहता हूँ
हठाकर बुराई
फैंकना चाहता हूँ !
शिक्षक जी मुस्कुराया
दोनों हाथ फैलाकर बतिआया ,
सुन गधे
तू क्या कर पायेगा ?
सारे दिन नंगा घूँमता
ईंटे ढोता है
लोगों को हँसाता है
अब क्या खाक ?
पढ़ पायेगा !
गधा सिमटकर ढेर हो गया
किंतु अंदर तूफ़ान जगाकर
प्रधान जी के पास पहुँचा
सर , मैं पढना चाहता हूँ
कुछ बनना चाहता हूँ
गधा रुपी बीमारी ,
समाज से हटाकर
फैंकना चाहता हूँ !
प्रधान जी मुस्कुराए
रस भरी आवाज में बतिआए ,
कोई बात नहीं
पढ़कर क्या करलोगे ?
यहाँ सभी गधे हैं
समाज गधों से भरा है
फिक्र नहीं करते
गधा भी महान है !
गधा ठनक कर अंदर भड़का
जाकर बीच चौराहे पर चिल्लाया ,
मुझे पढना है
कुछ बनना है
शोर मचा दिया !
कुछ सज्जन पुरुष पास आकर बोले ,
क्यों जी ठीक तो हैं?
क्यों गूँज रहे हो ?
धूप में तप रहे हो !
गधा मुस्कुराकर बोला ,
मैं गधा हूँ
आप महागधे हो !

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