गधों का मेला

पास खड़े युवक से
निगाहें टटोलते पूछा ,
भाई मुझे कुछ बताइए
कहाँ से आ रहे हो ?
आप !
पीछे हठकर युवक बोला ,
क्या पता है ?
आपको ,
वहाँ गधों का मेला है
नाना प्रकार के
छोटे- बड़े
गधे बेचे जा रहें हैं
घुलेआम घुमाघुमाकर !
मैं अचानक ठहर गया
कल्पनाओं की,
झड़ी लगाकर खुद में ,
इंसान ढूँढ़ने लगा
मानो बहती नदी में
छलांग लगाकर
खोजने लगा !

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