वो दामन भी

छूट गया वो दामन,
वो अब एक फटा हुआ कफन है।
मेरी बसी हुई बस्ती उजड़ गयी,
शेश बचा एक उजड़ा चमन है।।

आशाओं के दीप गुल हुये अब,
घनी काली राते अब छायी हैं।
रूसवाइयां नसीब में मिली अब,
अरसे बाद मुलाकातें अब ठुकराई हैं।।

इतनी मुहोब्बत दी हमने कि-
उन्हें दिल-ऐ-गरूर हो बैठा।
के कोई जीता है मेरी ही सांसों से,
इसी भ्रम में वो हमसे दूर हो बैठा।।

वफा सुरज अरसो बाद अब,
दूर-पश्चिम में ढल गया।
देख हश्र प्रेम कहानी का,
पूनम का चांद अब संभल गया।।
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