एक प्रेम कहानी

मेरे हसरत भरे ख्वाबों से,
हर रात कोई तो दिल से गुजरती है।
दिल में एक टीस सी उठती है,
जब तन्हाई दिल से गुजरती है।।

सोचता हूँ मैं बहुत दफा,
कि मैने क्यूं इतना प्यार किया।
वो तो मेरे जज्बात ही ना समझे,
फिर मैंनें क्यूं इतना दिल-ऐ-ऐतबार किया।।

तड़प अब उठती है दिल से,
उनके जुदा होने के बाद।
कैसे उसने प्याला ठुकरा दिया,
हलक में सुधा होने के बाद।।

अब रात काली और दिन गुमसुम है,
तब रात दिवाली और दिन होली थे।
कितनी खुशियां थी मेरी जिन्दगी में,
जब वो मरे हमजोली थे।।

तन्हाइयों की आहट का हमें,
जरा भी अहसास नहीं रहा तब।
मेरी जिन्दगी एक इन्सां में ही सिमटी रही,
इसका मुझे अहसास नहीं रहा तब।।

खुशियों का जमघट था लगा,
खुले थे तब मेरे दिल के द्वार।
कोई तोल जाता दिल-ऐ-मुहोब्बत से,
चर्चे आम था मेरा प्यार।।