अब उठो तुम भी

लो उठो अब तुम भी,
के भोर हो रहा है,
सीमा पे दुश्मन का शोर हो रहा है,
तुम भी उठा लो अपने हथियार साथियों।
आज दुश्मन के आगे देश कमजोर हो रहा है।।

बहुत चुपिया साध के देख तो लिया,
अपना बहुत कुछ गवां के देख तो लिया।
अब और सहन मत करो साथियों,
हमने सरबजीत को गवां के भी देख लिया।।

कभी सीमा पे संघर्श विराम तोड़ा तो,
कभी अपने जवानों के शीश काट ले गये।
आखिर अब कब तक चुप बैठे हम,
हम चुप बैठे और दुश्मन हाथ काट ले गये।।

अब वक्त को जाया ना करो, कर दो आज तुम भी आगाज,
के दुश्मन खुद को खड़ा भी ना कर पाये कभी।
आज तक जो सहा बहुत सह लिया हमने,
कर दो वो हाल कि फिर कान खड़ा भी ना कर पाये कभी।।

दम तो बहुत है अपने वीरों में मगर,
अफसोस अब तक उनके हाथ बंधे रहे हैं।
मिटाने को तो अब तक दुश्मन का वजूद मिटा देते,
मगर सियासत के खुटों से हाथ बंधे रहे हैं।।
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