दुश्मन फिर पुकार रहा

कब तक खामोश रहेंगे,
कब तक दिल पे चोट सहेंगे।
हिन्दुस्तानी शेर कायर हैं,
कल संसार के सारे लोग कहेंगे।।

हिन्द के शेर संसद के खुंटों से बंधे हैं,
कि दुश्मन घर से सर काट ले गये।
कुछ ना कर सके वीर-बहादुर हिन्द के,
दुश्मन बेखौफ आये और पर काट ले गये।।

हिन्द के शेर संसार में शक्ति के प्रतीक हैं,
पर क्या करे मंत्री लोग गन्दी राजनीति में शरीक हैं।
कैसे मुंहतोड़ जवाब दे, शेर मेरे हिन्द के,
नेताओं की एक जमात दुश्मन के मंसुबों में शरीक हैं।।

दुश्मन संघर्श विराम तोड़ता बार-बार,
फिर भी चुप साध बैठ जाते हम हर बार।
एक घण्टे की ही मोहल्लत दे दो मेरे शेरों को,
विजय पताका फहरा के दिखा देंगे हम लाहौर के बाजार।।
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