बरसात-ऐ-मौसम

मौसम-ऐ-बरसात में तो,
हम याद आते ही होंगे।
बहार-ऐ-फिजाओं के मौसम में,
नजारे-ऐ-कुदरत के भाते ही होंगे।।

दिल-ऐ-जिगर में तुफान तो,
जरूर ही उठा होगा मेरी यादों का।
दिल-ऐ-तड़प तो बेचैन करती ही होगी,
गुजरे जब दिल-ऐ-चमन से बादल यादों का।।

कुदरत-ऐ-करिश्मों से दिल,
मचलता तो बहुत होगा तुम्हारा।
बरसात-ऐ-मौसम में भिगते जिस्म पे,
दिल-ऐ-जिगर फिसलता तो बहुत होगा तुम्हारा।।

घटा-ऐ-कुदरत-ऐ-मौसम में,
बहार-ऐ-बरसात या हुस्न-ऐ-मलिका को निहारें,
दिल-ऐ-चमन में दोनों का ही रूप निखरा है,
तु बता ऐ हसरत-ऐ-दिल किस छटा को निहारे।।
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