धुँआ……..

जिंदगी है धुँआ,बेशक्ल सा धुँआ,

 आग नहीं सुलगता, फिर भी जलता है धुँआ

इसकी राह है धुँआ,मंजिले है धुँआ ,

 रात है इस जिंदगी में, फिर भी दीखता है धुँआ .

ख्वाहिशे हैं धुँआ , गहरे भेद हैं धुँआ ,

आँखों में कुछ जलता नहीं, फिर भी उठता है धुँआ .

आग है धुँआ,पानी है धुँआ ,

साँसे रुक जाये ,फिर भी जिन्दा है ये धुँआ .

बेशक्ल सी आवाज है धुँआ , अनसुने चेहरे है धुँआ,

चले जाते है सब , फिर भी रहता है ये धुँआ .

धरती है धुँआ , आकाश है धुँआ ,

तुम हो धुँआ , मैं हुँ धुँआ .

खामोश हैं सब ,पर पुकारता है धुँआ,

भीगा है ये जहां, फिर भी सुलगता है ये धुँआ .

जिंदगी है धुँआ , बेशक्ल सा धुँआ,

आग नहीं सुलगता, फिर भी जलता है धुँआ .

नितेश सिंह(कुमार आदित्य )

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