मरण

कुछ लोग जीते रहते हैं
आगे के समय में
मर जाने के लिए

अब तक मैं कैसे जीता रहा हूँ
जब पिछले समय में
मर चुका हूँ
कई-कई बार

जिससे तुम अब मिलती हो
वह मैं नहीं
मेरा प्रेत है

मैं ऎसा प्रेत हूँ
जिसे न जाने
क्यों तुम प्रेम मानने से
अस्वीकार करती हो

बार-बार
क्या तुम मुझे
एक प्रेत की तरह भी
जीने नहीं दोगी
अपने संसार में?

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