आदमी- आदमी को नहीं पहचानता है ,

इतना तो हर कोई मानता है ,
गुजरती है जिस पर, वही जानता है.

कितना कठिन समय है दोस्तों,
आदमी- आदमी को नहीं पहचानता है ,

झोपड़ी तक सूरज भी आने लगा है,
लोग कहते है ये उसकी महानता है ,

वे जिधर चाहेंगे हँका के ले जायेंगे ,
भेंड़ों में हममें कितनी समानता है ,

Leave a Reply