काव्य- (शोपिंग) – कवि~ विनय ‘भारत’

एक शोपिंग माल में हमें प्यार हो गया

यूँ हीं आते जाते इकरारहो गया

शोपिंग की लत इतनी थी उन्हे क्या बताऊँ यार

शोपिंग कराके प्यार में

कंगाल हो गया

कवि~ विनय ‘भारत’