रईश जादे

हमने देखा है बहुत प्यार करने वाले
बड़े मायूस मजनू बनकर आते हैं
निकालते हैं अपनी भड़ांस मेरी बाहों में
रात भर हमें रौंद कर चले जाते हैं

देखि है हमने कई बड़े बड़े रईश जादे
भिखारी कि तरह सामने गिड़गिड़ाते है
उतारते हैं रात भर हवस अपनी
खाली बोतल कि तरह सुबह लुडक जाते हैं

ये लोग है इज्जतदार शहर के माने जाने
रात के अँधेरे में माशुमो कि आबरू उतारते हैं
घर में अपनी दुल्हनको अकेली छोडकर
बाजार में अपनी मर्दानगी को आजमाते हैं

काले करतूत करके सफेद कपडे पहनने वाले
इनकी बात कौन करे दूसरों को निहारते है
जाते है तीरथ करने लगाके गंगा में डुबकी
जैसे अपने गुनाहों को ये सुधारते हैं

हरि पौडेल
नेदरल्याण्ड

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