गजल

किसने कहा कि मै बदनाम हो गया
उनकी गली में आते ही नाम हो गया

आदत लगी इनकी कि उठते नहीं बनती
पूछने आया सिर्फ हाल था और शाम हो गया

नजरे है ऐसी शोखी कि दिल आ जाए बाहर
शर्वते अनार को छुवा तो भरी जाम हो गया

जबसे मिले है उनसे जी कही नहीं लगती
बड़े कामका था मै और बेकाम हो गया

जाना नहीं मुझे कही ईस्वर को ढूढने
जलादो मुझे यही ये तीरथ धाम हो गया

हरि पौडेल
नेदरल्याण्ड

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