जमानत बुड्डे की

जमानत होंनी थी
बुड्डे की
थाने में
तंगी थी
कागज की
वकील के खजाने में
बाज़ार की कई दुकानों में!
परेशान था वकील
मुँह लाल था,
नोट पर,
कुछ लिखता
किंतु कलम थी निराली
यानी खाली
स्याही तनिक नहीं
मुस्किलें अडचलें
मुँह फाड़ें खड़ीं थी
सामने
भिखारी बनकर!
वकील खुजलाया
दस्तावेज डाल आया
केश लौट आया
बुड्डे पर,
शनि फिर छाया
सिर पर सवार होकर मँडराया!

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