कौन सी दौलत पे तू रहता बड़ा मगरूर है SALIM RAZA REWA

ग़ज़ल

कौन सी दौलत पे तू रहता बड़ा मगरूर है
बस वही होगा ऐ बन्दे रब को जो मंज़ूर है

हौसला हिम्मत अमल करना जरूरी है मगर
याद रखना आदमी तक़दीर से मजबूर है

है मुबारक बाद उन मां बाप को ऐ दोस्तों
बेटियां के जिनके माथे पे सज़ा सिन्दूर है

कोशिशे पैहम से इकदिन पा ही लेता है ज़रूर
कौन कहता है कि मंजिल आदमी से दूर है

आज भी गुमनामियों में जी रहे लाखों यहाँ
शुक्र है तू चंद दिन में ही”रज़ा” मशहूर है

9981728122

2 Comments

  1. acharya shivprakash awasthi आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी 30/12/2015
  2. salimraza salimraza 31/12/2015

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