मुक्तक

अगर होता कोई मधुवन तो मैं चितचोर बन जाता

अगर होता कोई गोकुल तो मैं दधिचोर बन जाता

बसा लेता तुम्हे नयनों के अपने इस समंदर में

मैं बनता गंध चन्दन की तेरे हर ओर बस जाता

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