कविता- “वो” कवि विनय भारत

उसको देखा है

खुले आसमाँ में

सर्द सी हवाओं में

वो दूर है लेकिन

महसूसकर रहा हूँ

इस चाँदनी

रात में

वो है तो लगता हैं

कि दुनिया हैं

वरना

रखा ही क्या हैं

इस बेदर्द जमाने में

कवि विनय भारत