अधूरा प्यार और पूरी खुशियाँ

शिसकियां लेता रहा, मैं खड़ा उस राह पर,

उनकी नजरे जा पड़ी, दूसरी किसी राह पर

मैं वहीं गुमराह था, फिर कही मिल जाएं हम

जैसे ही देखा उन्हे खुश, दुसरों की बाहों में

सोचकर उनकी खुशी, चल दिया रस्ते बदलकर

इम्तहाँ की इस घड़ी मे, ओझल कही हो जाएं हम

बस दुवा निकली यही इक, खुश रहे हर मोड़ पर

मैं बस जोकर ही था, जिसने हंसाया हर मोड़ पर

ऐ अवी अब भूल जा तू, इक सुखद सपना समझकर

हंसना रोना जिंदगी है, चल दे तू रस्ते बदल कर ||

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