बड़ों से मजाक

बेटे से बोला,बाप
बेटा तू अज्ञानी है
तेरी आदत हरामी है
तू निकम्मा है
कमीना है
तेरी बुद्धि जानवर की तरह है!
बेटा खिसिआया
लाल आँख कर बतिआया
पिताजी
तुम कहते ठीक हो
मगर सुनते कम हो
अज्ञानता मुझे सिखाती ज्ञान
जैसे तलवार और म्यान
गुरु मुझे देते ज्ञान
जैसे मूर्ख और सयान!
पिताजी थोड़े मुस्कुराये
करते हुए
मजाक
बेटा फिर खुलकर बोला,
क्यों करते हो?
मजाक भारी
क्या मैं लगता हूँ?
भाभी या साली !

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