होना चाहिए

सभी बातें दरकिनार, बस मन साफ़ होना चाहिए I
कुछ तो करो रहम, कुछ तो इन्साफ होना चाहिए I

बड़ी सर्द हैं ये सर्दी की रातें जरा बच कर रहना,
कुछ तो करो अलाव कुछ तो ताप होना चाहिए I

जवानी की दहलीज़ पर पहला कदम, संभल कर,
फिर न कहना कि गलती हुई, माफ़ होना चाहिए I

आस्तीन के सांपो को अनदेखा करना है गुनाह,
एकजुट होकर हमें जुर्म क़े खिलाफ होना चाहिए I

जो करीब हैं, अपने हैं, उनसे ही तो ख़तरा है यारों,
पहले तोल फिर बोल, हर बात का माप होना चाहिए I

जीवन की नैया पार लगाना चाहता है तो सुन ‘चरन’
बाहर कुछ भी हो, अंदर प्रभु का जाप होना चाहिए II
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त्रुटि हेतु क्षमा प्रार्थी – गुरचरन मेहता

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