तरही गज़ल

नाम अल्लाह का लेकर मै निकल जाऊँगा

मै जो हालात का मारा हूँ, संभल जाऊँगा |

दूर मंज़िल है बहुत राह में दुश्वारी भी

हाथ में हाथ दे वरना मै फिसल जाऊँगा |

बात झूठी हैं तेरी और हैं झूठी कसमें

क्‍यूँ समझता है कि बातों से बहल जाऊँगा |

दोष मुझमें हैं बहुत प्यार मगर सच्चा है

साथ तेरा जो मिलेगा तो बदल जाऊँगा |

रूठ जाना जो बहाना है फ़क़त इक पल का

तुम अगर प्यार से देखोगी पिघल जाऊँगा |

प्यार अंधा है मेरा, होश मगर बाकी है

ठोकरें खा के मुहब्बत में संभल जाऊंगा |

बन्दिशें प्यार पे मेरे न लगाओ यारों

ये वो अमृत है कि पीते ही संभल जाऊँगा ।

तेरी बातें तेरी ख़ुशबू हैं अभी तक मुझमें

मै अगर टूट भी जाऊँ तो संभल जाऊँगा ।

4 Comments

  1. सुनील लोहमरोड़ Sunil Kumar 06/02/2014
    • नादिर अहमद नादिर 07/02/2014
  2. Rinki Raut Rinki Raut 06/02/2014
    • नादिर अहमद नादिर 07/02/2014

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