घर को चला

आँखों में फिर से ख्वाब सज़ाए

सीने में कुछ अरमान दबाए

आज फिर कुचे को चला…..

यारों आज मैं घर को चला.

 

कहीं से एक ठंडी सी हवा

कुछ उदास शाम का धुआँ

दिल को फिर एकबार छला

यारों आज मैं घर को चला.

 

एक और बेचैनी की नींद

किसी एक शक्श की दीद

माहपारो के तलाश में चला

यारों आज मैं घर को चला.

 

उनसे फिर उम्मीद-ए-वफ़ा

फिर यह ज़माना मुझसे खफा

शीसा पत्थर टकराने चला

यारों आज मैं घर को चला

 

एक और नफ़रत भरी निगाह की तलाश मैं

मुहब्बत से ऊब गया हूँ,  नफ़रत की तलाश मैं

ज़न्नत छोर दोज़ख़् को सीने से लगाने चला

यारों  आज मैं घर को चला

यारों आज मैं घर को चला

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