थोड़ी सी हॅसी

 

गुरु बोले
चेलों से
आलस्य मत करो
अभिमान मत करो
अभिमान तुम्हें जला देगा
अगर आलस्य करोगे रोज -रोज
तो ये आलस्य भी
तुम्हें बिगाड़ देगा !
तभी एक चेला बोला
हॅसकर
गुरूजी दो बार नमन
क्योंकि आलस्य और अभिमान ?
पर बोलना है,
गुरूजी आलस्य मैं करता हूँ
मुझे कुछ होता नहीं है
किन्तु बिस्तर स्तर पर
लेटता रहता हूँ
खड़ा नहीं होता हूँ !
गुरूजी अभिमान भी जब -तब
कर लेता हूँ
बस चुपके से सहलेता हूँ
जो मुझे दिखता
गूंगा बहरा
उसे गाली दे देता हूँ !

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