“सर पे वरद् हस्त, मेरी मातु धर दे”

मातु हंस वाहिनी, प्रदानी ज्ञान दायनी,
सर पे वरद् हस्त, मेरी मातु धर दे।
है मेरी मातु अर्चना, सिखा दे काव्य सर्जना,
तू काव्य क्षेत्र में मुझे, समर्थवान कर दे।।
है मेरी अरदास मातु, दास आपका हूँ मैं,
मेरे भाव पुंज में तू, दिव्य ज्ञान भर दे।
देश व समाज हेतु, काम आ सकूं मैं मातु,
प्रार्थना यही है मातु, ऐसा मुझे वर दे।।
रचनाकार :: मनमोहन बाराकोटी “तमाचा लखनवी”

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