आखिरी फरमान

यह  आखिरी फरमान है सम्भल जाइये

दहलीज पर  तूफान है सम्भल जाइये ॥

ऊची दुकान कब तक ऊंची बनी रहेगी

फीके पडे पकवान हैं सम्भल जाइये ॥

बदलो खुदा के वास्ते सड्ते हुए रिवाज

आवाम परेशान है सम्भल जाइये॥

कुछ लोग आ चुके हैं जादु की छडी लेकर

अब जंग का एलान है सम्भल जाइये ॥

जब दिलों ंमें खोट हो चेहरा नहीं खिलता

बेकार ये मुस्कान है सम्भल जाइये  ॥

है वक्त का तकाजा उसको सजा मिले

पर्दे का वो शैतान है सम्भल जाइये ॥

दास खुद भी झाकियें अपने गिरेबां मे कभी

फिर सत्य का अपमान है सम्भल जाइये ॥

—————————————————–शिवचरन दास

 

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