आम आदमी

आम आदमी

आम आदमी को ठग लेता है आम आदमी
आम आदमी से झूठ बोलता है आम आदमी
आम आदमी को धोखा देता है आम आदमी
आम आदमी को मुर्ख मानता है आम आदमी
आम आदमी को सपने दिखाता है आम आदमी
आम आदमी से कसमें वादे करता है आम आदमी
आम आदमी को ठेंगा दिखाता है आम आदमी
फिर भी –
बहुत भोला है आम आदमी
सहज विश्वास करता है आम आदमी
लोकतंत्र को मानता है आम आदमी
हर बार फँसता है चक्रव्यूह में आम आदमी
कभी महँगाई से बिलबिलाता आम आदमी
कभी भूख से पेट पकड़ता आम आदमी
कभी रोजी को तरसता आम आदमी
कभी बाबुओं के चक्कर में पिसता है आम आदमी
कभी नेताओं के चक्कर में फँसता है आम आदमी
कभी बाबाओं की किरपा झेलता है आम आदमी
कभी निराशा में डूबता है आम आदमी
कभी सपनो में तैरता है आम आदमी
मगर –
सब कुछ सह कर भी जिन्दा है आम आदमी
हर एक गलती से सीखता है आम आदमी
समझते हैं नेता- सोता हुआ शेर है आम आदमी
आम आदमी जानता है- ताकत आम आदमी
बड़े बड़े नेताओं को झटके में बना देता है आम आदमी

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