मौत

मौत एक परछाई जैसे, साथ लिए हम चलते हैं
मौत एक शहनाई जैसे, जीवन की धुन गाए जैसे
क्योंकि वो कौन हैं जिसे मौत ना आई हैं!!
 
मौत एक अफ़साना जैसे, जिसे एक दिन आना है
मौत एक तराना जैसे, जिसे एक दिन गाना है
क्योंकि वो कौन हैं जिसे मौत ना आई हैं!!
 
मौत एक धुंद हो जैसे, बढ़ रही है धीरे धीरे
रात से सुबह की ओर, पकड़े ये जीवन की डोर
क्योंकि वो कौन हैं जिसे मौत ना आई हैं!!
 
मौत एक राही हो जेसे, बढ़ रही हो राह पर
शून्य से शून्य की ओर, जैसे कोई खामोश सफ़र
क्योंकि वो कौन हैं जिसे मौत ना आई हैं!!
 
मौत के आगोश मैं जैसे, सर रखकर हम सोते हैं
मौत की साजिश हो जैसे, पर हम सोते ही रहते हैं
क्योंकि वो कौन हैं जिसे मौत ना आई हैं!!
 
मौत की आहाट हो जैसे, कहा कोई सुन पाता है
बस तमाशा बन रह जाते जैसे, कोई बैठा रहता है
क्योंकि वो कौन हैं जिसे मौत ना आई हैं!!
 
मौत एक दुल्हन की जैसे, लाल जोड़े मैं बैठी हैं
बस डोली उठनी बाकी जैसे, कोई जीवन साथी है
क्योंकि वो कौन हैं जिसे मौत ना आई हैं!!
 
करो तैयारी कोई जैसे, नया जन्म हो होने वाला,
मौत का स्वागत करो
क्योंकि वो कौन हैं जिसे मौत ना आई हैं!!

—————————–सुदर्शन सोनी “दर्श”

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