कविता- ऐ जिंदगी -कवि विनय भारत

जिंदगी कुछ ऐसा कर

जिंदगी कुछ वैसा कर

कुछ ऐसा कर

कुछ वैसा कर

कुछ कर के कर

कुछ कर ना कर

पर

करके फिर कुछ ऐसा कर

कि
पता चले कि

ये तूने क्या किया

कवि विनय भारत

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