पागल

wo pagal ladki
है एक पागल, जो मुझसे प्यार करती है,
खफा है सारी दुनिया से पर मुझ पर ऐतबार करती है |
ज़रूरत ही नहीं सरे जहाँ कि मुहोब्बत कि,
अकेली वही मुझसे इतना प्यार करती है |
एक पागल है जो मुझसे प्यार करती है ||

जब रूठूं तो रोने लग जाती है,
जब प्यार से बोलूं तो हंसने लग जाती है |
उम्मीद नहीं रखती मुझसे कुछ पाने कि,
बिना ख्वाहिश के मुहोब्बत लुटाती जाती है ||

कागज पर ज़िंदा हो जाते हैं अल्फाज़,
जब वो मेरी कलम का श्रंगार बनती है |
एक पागल है, जो मुझसे प्यार करती है ||

उसकी लड़ाई में भी प्यार झलकता है,
उसकी जिद्द में भी अपनापन झलकता है |
गुस्से में जब वो मुझे कुछ सुनती है,
तब दिल को अंजना सा सकूँ मिलता है ||

वो हसीना तब और भी यादगार बनती हैं,
गले लगाकर जब वो ख़ुशी से मचलती है |
एक पागल है, जो मुझसे प्यार करती है ||

वो सजना संवारना नहीं जानती,
अपनी ख़ुशी को जाहिर करना नहीं जानती |
मैं जो भी कह दूँ, सच ही होगा,
मैं गलत हूँ, इस बात को वो नहीं मानती ||

वो दिल कि गहराई में और उतरती है,
जब मुझसे लिपटकर मेरा फैसला स्वीकार करती है |
एक पागल है, जो मुझसे प्यार करती है ||

उसकी हंसी से दिल कि कलियाँ खिल जाती हैं,
आँखों के इशारें से खोई राहें मिल जाती हैं |
दिल से दिल तक का सफ़र तय हो जाता है,
जब कभी नज़र से नज़र मिल जाती है ||

ज़िंदगी कि तस्वीर बेरंग नज़र आती है,
जब वो पागल, दूसरी गली से गुजरती है |
एक पागल है, जो मुझसे प्यार करती है ||

किसी और से बतियाने पे नाराज हो जाती है,
मैं सिर्फ उसका हूँ, ये हक़ जताती है |
मुझे मेरे ऐब गिनती रहेगी हमेशा,
अपनी सखियों को मेरी तारीफें सुनती हैं ||

उसका साथ और भी प्यारा लगने लगता है जब वो,
तुम बहुत प्यारे हो कहकर मुझे बाँहों में जकड़ती है |
एक पागल है, जो मुझसे प्यार करती है ||

कुछ लिखने कि सोचो तो वही याद आती है,
किसी से बतियाना चाहूं तो वही याद आती है |
सोने से पहले भी और उठने पे सबसे पहले,
मुझे उसी पगली लड़की कि याद आती है ||

मेरे सपनों कि अँधेरी गलियों से,
वो पागल हंसती हुई गुजरती है |
एक पागल है, जो मुझसे प्यार करती है ||
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