काव्य- व्यंग्य -कवि- विनय भारत

हेभारत मीडिया

तू ये क्या गजब ढा रहा है

टी आर पी बढती जा रही हैऔर

संस्कार मिटाता जा रहा है!

कवि- विनय भारत