किसके कहने से

एक गीत आपकी नज़र***
भूमिका – एक दोस्त जो किसी के कहने में आकर गलत रास्ते पर चल पढ़ा है, और अपने पुराने दोस्त को भूल गया है, तो उसका वह बचपन का जिगरी दोस्त उससे क्या कहता है —

(किसके कहने से )***

तुझे भूलें हैं दोस्त पुराने, किसके कहने से
तू जाने लगा रे मयखाने, किसके कहने से

रोटी, संग संग बाँट के खाते थे
एक आवाज़ पे हम चले आते थे
अब लगा तू बहाने बनाने, किसके कहने से
तुझे भूलें हैं दोस्त पुराने, किसके कहने से

जब नए लोगों से दिल भर जायेगा
लंगोटिया तुझे, यार याद आयेगा
तुझे आ गए रे नोट कमाने, किसके कहने से
तुझे भूलें हैं दोस्त पुराने, किसके कहने से

तेरे ग़म को ग़म हमने माना
निकला तेरा साया भी बेगाना
तूने दिए हमें कैसे कैसे ताने, किसके कहने से
तुझे भूलें हैं दोस्त पुराने, किसके कहने से

दोस्ती के हमारी किस्से सुनाते थे
कंचे खेले कभी, पतंग उड़ाते थे
अब आ गए तुझे मजाक उड़ाने, किसके कहने से

फिर भी सदा तेरी राह मैं तकूँगा
चौबीस घंटे दर खुला मैं रखूँगा
कब आ जाएँ तेरे होश ठिकाने, किसके कहने से

तुझे भूलें हैं दोस्त पुराने, किसके कहने से
तुझे भूलें हैं दोस्त पुराने, किसके कहने से
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त्रुटि हेतु क्षमा प्रार्थी – गुरचरन मेहता

One Response

  1. सुनील लोहमरोड़ Sunil 29/01/2014

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