चार पन्कियां २

मुस्कान तो कभी मिली ही नहीं किसी को इस जहां मे सदा के लिये,
क्योंकि खुशियां मिलते ही भूल जाते हैं उस रब को सदा के लिये,
भरोसा तोड के गया है हर शक्स इस दुनिया में,
इसलिये भरोसा करना ही छोड दिया है हमने सदा के लिये !!

27 jan 2014

7 Comments

  1. सुनील लोहमरोड़ Sunil 27/01/2014
    • Muskaan 27/01/2014
  2. Abhiraj Singh 28/01/2014
    • Muskaan 12/03/2014
  3. शुभम् श्रीवास्तव 'ओम' शुभम् श्रीवास्तव 'ओम' 28/01/2014
    • Muskaan 12/03/2014
  4. Sukhmangal Singh sukhmangal 02/06/2015

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