चार पन्कियां

मुस्कुराना छोड के कोई जी नही सकता,
और सदा के लिये मुस्कान होठों पे कोई रख नहीं सकता,
इस जमाने मे कोई बातों के शेर तो सब हैं,
जब सामना हकीकत से होता है तो शेर हर कोई बन नही सकता !!

27 jan 2014

2 Comments

  1. सुनील लोहमरोड़ Sunil 27/01/2014
    • Muskaan 27/01/2014

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